ऋषिकेश, 30 नवम्बर । परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर श्री सत्यसाईं बाबा के अनुयायियों का दल साधना शिविर हेतु पहुुुंचा। इस दल मेंभारत तथा विश्व के यथा कर्नाटक, मुम्बई, तमिलनाडु, चेन्नई, बेंगलुरू, सिंगापुर, स्वीडन, श्रीलंका, मलेशिया, अमेरीका, थाईलैण्ड एवं अन्य अनेको देशों से आये अनुयायियों ने सहभाग किया।
इस ध्यान साधना शिविर मंे विदेशी साधक भी भारतीय संस्कार और भारतीय वेशभूषा में रंगे हुये दिखें। यह तीन दिवसीय साधना शिविर श्री मधुसूदन नायडू जी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हो रही है।
आज परमार्थ गंगा तट पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के संस्थापक स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री मधुसूदन नायडू जी, साईं बाबा के प्रमुख जिनके बारे में प्रसिद्ध है कि उनके माध्यम से साईं बाबा श्री अब अपना संदेश देते है एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने मिलकर की गंगा आरती। स्वामी जी ने श्री मधुसूदन नायडू जी को पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।
श्री मधुसूदन नायडू जी ने कहा कि 'साधना अगर परिष्कृत, स्वच्छ एवं दिव्य वातावरण में की जाये तो विशेष फलदायी होती है और ध्यान साधना पर तो स्थान का विशेष प्रभाव पड़ता है। उन्होने कहा कि परमार्थ निकेतन, ऋषियों की तपस्थली है, परमार्थ गंगा तट दिव्यता से युक्त है एवं शान्ति दायक स्थान है यहां पर की गयी साधना से जीवन में विलक्षण परिवर्तन हो सकता है; यह स्थान आत्मोत्कर्ष के लिये उपयुक्त है। उन्होने कहा कि साधना के यह तीन दिन आत्मोन्नति के हैं, जिसके माध्यम से जीवन को ऊर्जावान बनाया जा सकता है।'
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ''भारत की संस्कृति जीवन जीने का एक रोड़ मेप है। श्री सत्य साईं बाबा जी ने 'लव आॅल , सर्व आॅल, अर्थात ”सबको प्यार करो, सबकी सेवा करों“ का जो सूत्र दिया है उसका अनुकरण करते हुये अपनी साधना को पीड़ित मानवता, प्रकृति, पर्यावरण और जीवनदायिनी नदियों के संरक्षण में लगायें यही श्री सत्य साईं बाबा को हमारी ओर से सच्ची प्रणामांजलि होगी। उन्होने उपस्थित सभी साधकों एवं अनुयायियों से आहृवान किया की वर्तमान समय में प्रदूषण जैसी वैश्विक समस्या का समाधान करने के लिये सभी को मिलकर अपनी सामथ्र्य एवं ऊर्जा का उपयोग कर इस विकराल समस्या का समाधान करना होगा यही तो है सबको प्रेम करना, लव आॅल और सर्व आॅल। स्वामी जी ने कहा कि ध्यान साधना भीतरी वातावरण को स्वच्छ, स्वस्थ एवं समुन्नत बनाती है परन्तु इसके लिये हमें बाहरी वातावरण को भी स्वच्छ रखना होगा। अब साईं और सफाई चले साथ-साथ। जीवन में सफाई हो और सच्चाई हो यही जीने के तरीका है। अब हम सब का मंत्र सेवा का मंत्र सेवा का मंत्र हो।
स्वामी जी ने कहा कि साधना के द्वारा मनुष्य 'इनर सेल्फ' को भर कर आध्यात्मिक उन्नति के शिखर तक पंहुच सकता है। परन्तु मनुष्य अपने शेल्फ को; अलमारियों को भरने में पूरा जीवन लगा देते है और इन सब को भरते-भरते कई बार इनर सेल्फ खाली ही रह जाता है साधना के माध्यम से इनर सेल्फ की रिक्तता को भरकर जीवन में अनेक सकारात्मक परिवर्तन किये जा सकते है और उसे प्रकृति, पर्यावरण की सेवा में लगाये यही है 'लव आॅल, सर्व आल'।
सभी अनुयायियों ने सायंकालीन गगां आरती में सहभाग किया स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने शिवत्व का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा विशिष्ट अतिथियों को भेंट किया। आज पूरा परमार्थ तट साईं संकीर्तन से गूंज उठा। स्वामी जी ने सभी को साईं और सफाई चले साथ-साथ का संकल्प कराया।
जीवन में सफाई हो और सच्चाई हो यही जीने के तरीका