ऋषिकेश, 26 नवम्बर। स्वतंत्र भारत के इतिहास में आज का दिन बहुत ही ऐतिहासिक दिन है। गुलामी की जंजीरों से जकड़े हमारे देेश ने आजादी की खुली हवा में श्वास लेने के लिये अपने संविधान को अंगीकार किया था।
वर्ष 2008 में भारत में आज के ही दिन एक हृदय विदारक घटना घटी जिसने पूरे देश को दहला दिया था वही था मुम्बई आतंकवादी हमला। मुम्बई में तीन दिनों तक चले इस आतंकी हमले में 166 लोग मारे गये थे जिसमें हमारे वीर शहीदों ने अपने प्राणों की आहुतियां देकर आतंकियों का खातमा किया था। वास्तव में यह हमारे जाबाज शहीदों का सर्वोच्च बलिदान था जिसे युगो-युगो तक याद किया जायेगा।
26/11 के शहीदों की याद में परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने रूद्राक्ष के पौधे का रोपण किया। आज की परमार्थ गंगा आरती शहीदों को समर्पित की गयी।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों को संविधान का महत्व समझाते हुये कहा कि संविधान ही है समाधान इस देश का। राम जन्म भूमि पर आये निर्णय पर बोलते हुये कहा कि संविधान ने इस बार एक ऐसी मशाल जलायी है; एक ऐसी मिसाल कायम की है जो सदियों तक कायम रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को रोशनी देते रहेगी। संविधान के अनुरूप माननीय सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों ने जो निर्णय दिया वह वास्तव में सम्मान करने योग्य है मुझे तो लगता है उन सभी न्यायधीशों का गंगा तट पर सम्मान होना चाहिये। स्वामी जी कहा कि इस फैसले को स्वीकार करने के लिये जो स्वीकृति, सम्मान और सद्भाव दोनों समुदाय के लोगों ने दिखाया है यह सचमुच काबिले तारीफ है, इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये उतनी कम है। इस ऐतिहासिक फैसले को लाने में जिन वकीलों और न्यायधीशों ने दिन रात मेहनत की तथा अपने तर्को को संविधान सम्मत तरीके से रखा उनका भी सम्मान करने की स्वामी जी ने इच्छा व्यक्त की। उन्होने कहा कि वर्षो के इंतजार के बाद एक फैसला आया जिसने भारतीयों के बीच फासला भी न आने दिया और इस एक फैसले ने सारे फासले ही दूर कर दिये।
भारत में 26/11 को आज से दस वर्ष पूर्व एक अत्यंत हृदय विदारक घटना घटी थी जिसमें हमारे देश के सैनिकों ने आपने देश वासियांे की रक्षा और देश की अस्मिता को बचाये रखने के लिये अपने प्राणों की आहुतियाँ दे दी। इस घटना ने हर भारतीय के दिल को दहला दिया था उस समय भारत का हर दिल रो पड़ा था। स्वामी जी ने कहा कि हमारे शहीद आज हमारे बीच नहीं है परन्तु उनका परिवार हम सभी के बीच में है उन्हे हिम्मत देते रहे, उनका साहस बढ़ाये और उन्हे सहायता प्रदान करे कि वे हमेशा आगे बढ़ते रहे और हम सभी एक परिवार की तरह रहे। स्वामी जी ने कहा कि जैसे हमारा संविधान एक है वैसे ही सब इन्सान एक है। मानव-मानव एक समान सब के भीतर है भगवान अतः किसी को हेट न करे और न हर्ट करे। नफरत से किसी का नफा नहीं होता और मोहब्बत से किसी का नुकसान नहीं होती। उन्होने कहा कि देश में समता, सद्भाव और समरसता का पुल बनाये,रखे और दिलों को जोड़े। हमारा संविधान सारी दीवारों को तोड़ता है; दरारों को भरता है और दिलों को जोड़ता है ऐसे संविधान का सम्मान करे।
स्वामी जी ने कहा कि हम सभी कुछ ऐसा करें कि कोई पीछे न छुट जाये; सब के लिये समान अवसर हो; वतन का सम्मान करे। हमारे देेश में प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ाने के लिये ऐसी व्यवस्थायें बनायी गयी है कि कोई भी पीछे न छुट जाये। स्वामी जी ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी पूरे मनोयोग के साथ भारत और भारतवासियों के लिये कार्य कर रहे है अब हम सभी भारतीय एक साथ मिलकर कार्य करे तो विलक्षण परिवर्तन हो सकता है और इसी से होगा नये भारत का निर्माण।
स्वामी जी ने परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों को संविधान का सम्मान करने का संकल्प कराया।