ऋषिकेश/ 19 नवम्बर। विश्व टाॅयलेट दिवस पर चन्द्रेश्वर पब्लिक स्कूल में शौचालय यूनिट का उद्घाटन परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, ऋषिकेश मेयर श्रीमती अनिता ममगाई जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर अहमदाबाद, गुजरात से आयी रैक पिक्कर्स बहने और परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार उपस्थित थे।
आज टाउन हाॅल, ऋषिकेश में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ ऋषिकेश मेयर श्रीमती अनिता ममगाई जी, नगर आयुक्त श्री नरेन्द्र सिंह कुरियाल जी, अपर नगर आयुक्त श्री एल एम दास जी, पार्षद विजय बड़ोनी, मनीष बलवान, सुजीत यादव जयेश राणा, लवकान्त भोज आदि ने ऋषिकेश को स्वच्छ हरित और समृद्ध बनाने हेतु चर्चा की। स्वामी जी ने स्वच्छ ऋषिकेश का संदेश देते हुये कहा कि स्वच्छ ऋषिकेश से ही स्वच्छ भारत का निर्माण होगा क्योकि जब हम अपने शहरों, गांवों, गलियों, मोहल्लों को सम्भालेंगे तभी तो पूरा भारत स्वच्छ होगा। अपना शहर, अपनी शान इस संदेश के साथ आगे बढ़े। स्वामी जी ने कहा कि ऋषिकेश खुले में शौच से मुक्त हुआ उसी प्रकार खुले में कचरे से मुक्त ऋषिकेश बनाना है। हमारा लक्ष्य हो कि हम अपने शहर ऋषिकेश को स्वच्छता में पहला स्थान दिलाये, ऐसा तभी सम्भव होगा जब हम सभी मिलकर काम करेंगे। इस हेतु हमें सभी संस्थाओं, स्कूलों, सभी शक्तियों को जोड़ना होगा ताकि कोई भी पीछे न छूट जायें। स्वच्छता का कार्य महान कार्य है और इसे करने वाले भी महान है कोई छोटा नहीं है और कोई भी काम छोटा नहीं है।
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर उन्हें श्रद्धाजंलि देकर आज के कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। स्वामी जी ने कहा कि 'बंुदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।' यह शब्द आज भी झाँसी की रानी की वीरता को दर्शाते है। लक्ष्मी बाई, अपने राष्ट्र को स्वतंत्र कराने के लिये प्राणों का बलिदान करने वाली अद्भुत शौर्य की प्रतिमूर्ति थी। मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में अपने राष्ट्र के सम्मान और गरिमा को बचाये रखने के लिये अंग्रेजों से लड़ने वाली वीरांगना को नमन-वंदन। महारानी लक्ष्मी बाई ने इतिहास के पन्नों पर एक अमिट इबारत लिख दी की अगर हमारे पास साहस और जज्बा है तो अंग्रेजी हुकुमत क्या अपने गौरव, सम्मान और गरिमा के लिये पूरी दुनिया से लड़ा जा सकता है। झाँसी की रानी तो एक थी अब हर एक को अपने राष्ट्र के गौरव के लिये झाँसी की रानी बनाना होगा।
वाॅटर स्कूल, परमार्थ निकेतन, जीवा और डिवाईन शक्ति फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में हरिद्वार और ऋषिकेश के 64 स्कूलों में छात्रों को हैंडवाशिग, स्वच्छता, स्वच्छता आर्ट और पर्यावरण संरक्षण का प्रशिक्षण दिया जा रहा। परमार्थ निकेतन से प्रत्येक स्कूल में जीवा के विशेषज्ञ साप्ताहिक विजिट पर जाकर बच्चों को पर्यावरण और जल संरक्षण हेतु प्रोत्साहित करते है।
वाॅटर स्कूल में 3 वर्ष का पाठ्यक्रम रखा गया है जिसमें विशेष तौर पर पर्यावरण, जल, शौचालय और स्वच्छता पर विशेष जोर दिया गया है। बच्चों को प्रायोगिक और सैद्धान्तिक तरीके से जल का संरक्षण, प्रदूषित जल को स्वच्छ कर उसका अन्य कार्यो के लिये उपयोग करना, वृक्षारोपण और पौधों का संरक्षण जैसे प्रोजेक्ट दिये जाते है।
वाॅटर स्कूल के माध्यम से इस वर्ष विभिन्न स्कूलों में 28 शौचालयों का निर्माण किया गया। अभी तक इस प्रोजेक्ट के अन्तर्गत ऋषिकेश, हरिद्वार, गुमानीवाला, ज्वालापुर आदि स्थानों के स्कूलों में कुल 40 शौचालयांे का निर्माण हो चुका है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर आज हमारे साथ अहमदाबाद से आयी रैग पिक्कर्स बहने है जिनका भारत को गार्बेज फ्री भारत बनाने में बहुत अहम योगदान है। आज मुझे बहुत गर्व हो रहा है कि 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर भारत के प्रधानमंत्री जी ने भारत को खुले में शौच से मुक्त भारत घोषित किया। उन्होने देशावासियों का आह्वान करते हुये कहा कि खुले में शौच मुक्त राष्ट्र को अब कचरा मुक्त राष्ट्र बनाने में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है आईये कचरा मुक्त भारत बनाने में अपना योगदान प्रदान करे।
स्वामी जी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार आज भी विश्व के लगभग एक अरब लोगों को शौचालय की सुविधायें उपलब्ध नहीं है जिसके कारण उन्हें अनेक संक्रामक बीमारियों का सामना करना पड़ता है। उन्होने शौचालयों की स्वच्छता तथा ग्रामीण परिवेश की स्वच्छता में बदलाव लाने के लिये जन जागरण आंदोलन की शुरूआत पर जोर देते हुये कहा कि हमारा राष्ट्र 100 प्रतिशत ओडीएफ फ्री तब बन सकता है जब शौचालय के प्रति हमारी सोच बदलेगी।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सभी को भारत को ओडीएफ फ्री के साथ ओजीएफ फ्री अर्थात ओपन गार्बेज फ्री बनाने का संकल्प कराया। उन्होने कहा कि भारत में न कचरे के पहाड़ हो न पहाड़ों पर कचरा हो क्योकि दोनों ही स्थितियाँ हमारे और हमारे पर्यावरण के लिये घातक है।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि भारत की संस्कृति, सांस्कृतिक मूल्यों और सांस्कृतिक मान्यताओं में आचार-व्यवहार, स्वंय के प्रति, परिवार, समाज, संस्कृति और विश्व के प्रति जो हमारा दायित्व और कर्तव्य है उन सब के बारे में हमारे ऋषियों ने जो प्रबंध और उपबंध किये थे वह सब भारतीय अध्यात्म, शास्त्रों में समाहित है जो कि पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते है। स्वच्छता की संस्कृति हमारे वैदिक वांग्मय से लेकर के उपनिषद् और पौराणिक काल से भारत की संस्कृति का हिस्सा थी और आगे भी रहेगी हम इसे हृदय से स्वीकार करें तो स्वच्छ, समृद्ध और सुसंस्कृत भारत बना रहेंगा।
इस अवसर पर स्वामिनी आदित्यनन्दा सरस्वती जी, सुश्री नन्दिनी त्रिपाठी, श्री सतीश गोयल, श्रीमती वन्दना शर्मा, श्रीमती अनुराधा गोयल, आचार्य संदीप शर्मा, आचार्य दीपक शर्मा, रामचन्द्र, रोशन, मुकेश, उदय, परमार्थ गुरूकुल के आचार्य, ऋषिकुमार, रैग पिक्कर्स बहने एवं अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। स्वामी जी ने चन्देश्वर पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं को एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया। सभी ने मिलकर विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया।