ऋषिकेश, 25 दिसम्बर। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अटल रत्न सम्मान समारोह में सहभाग कर आशीर्वचन दिया। इस अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्री, भारत सरकार श्री रमेशचन्द्र निशंक जी, श्री रामलाल जी, अखिल भारतीय सह सम्पर्क प्रमुख, पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री, भाजपा, सुश्री देवश्री चैधरी, महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री, भारpत सरकार, श्री अश्विनी चैबे जी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री, भारत सरकार, श्री प्रभात झा जी, राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा, श्री पुरूषोत्तम रूपाला जी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भारत सरकार, श्री मनोज तिवारी जी सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा दिल्ली राज्य और अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
जी न्यूज़ के मुख्य संपादक श्री सुधीर चैधरी जी, योगेश्वर दत्त जी और संजय झा जी आई ए एस अधिकारी मध्यप्रदेश कैडर को अटल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि 'धर्म, जाति और सम्प्रदाय से उपर उठकर जीने वाले थे अटल जी। वे अटल थे, सबल थे और निर्बलों को बल थे, वे जिससे भी मिलते थे सहजता से उसके हृदय को छू लेते थे। अटल जी लोकसभा में हो या जन सभाओं में हो उनकी वाणी, उनकी विद्वता और उनकी नम्रता की त्रिवेणी समाज के हर वर्ग के व्यक्ति को छू लेती थी। स्वामी जी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को भारत रत्न मिलने से पूर्व और भारत रत्न मिलने के पश्चात वे एक ऐसे रत्न थे जो भारत माता के माथे पर बिन्दी की तरह चमकते रहेंगे और पूरे विश्व को समरसता, सद्भाव, सहजता और सरलता की दिशा देते रहेगे।'
स्वामी जी ने कहा कि अपने हृदय की महानता के कारण पूरे भारत वर्ष में महामना के नाम से प्रसिद्ध मालवीय जी ने काशी हिन्दू विश्व विद्यालय की स्थापना करके उन्होने शिक्षा का अलख जगाया था। उनका कहना था कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति तभी सम्भव है जब उस राष्ट्र के निवासी सुशिक्षित हो और व्यक्ति को अपने अधिकारों के विषय में जानकारी तभी हो सकती है जब वे शिक्षित हो। स्वामी जी ने कहा कि आज के समय में हमें महामना जी की शिक्षा व्यवस्था को अपनाने की जरूरत है। जैसा कि उन्होनेे कहा था कि जीवन का सर्वागीण विकास शिक्षा का मूलमंत्र हो। शिक्षा की ऐसी व्यवस्था हो कि विद्यार्थी अपने शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक शक्तियों का विकास कर सके। शिक्षा प्रत्येक समाज और राष्ट्र की रीढ़ होती है। हमारी शिक्षा पद्धति पर हमारा वर्तमान और भविष्य निर्भर करता है।
स्वामी जी ने कहा कि आज हमारे देेश के दोनों आदर्श पुरूष और भारत रत्न के संदेशों को आत्मसात और अनुकरण करना तथा उनका जीवन ही सभी के लिये प्रेरणा बने और यह प्रेरणा ही सारी पीड़ाओं को हरने का, शमन का जीवन संगीत पैदा करती है। दोनों महापुरूषों ने मनुष्य के भीतर के पर्यावरण को बेहतर बनाने का अद्भुत कार्य किया है। राष्ट्रनीति और राजनीति के पर्यावरण को सुरक्षित करने हेतु दोनों ने उत्कृष्ट योगदान दिया है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने बताया कि आज तुलसी माता का भी जन्मदिवस है। तुलसी को वेदों में महाऔषधि कहा गया है। जिसमें अनेक रोगों को शमन करने की शक्ति होती है। तुलसी का पौधा 24 घन्टे प्राणवायु आॅक्सीजन प्रदान करता है। यह एक बेहतर एंटी-आॅक्सीडेंट, एंटी-एजिंग, एंटी बैक्टेरियल, एंटी सेप्टिक एवं एंटी वायरल भी है।
'महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्य वर्धिनी। आधिव्याधि हरिर्नित्यं तुलेसित्व नमोस्तुते।'
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं अन्य विशिष्ट अतिथियांे ने बहुमुखी प्रतिभा के धनी कद्दावर नेता और भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी आदर्श पुरूष महामना मदन मोहन मालवीय जी की फोटो को पुष्प माला अर्पित की।
इस समारोह में प्रसिद्ध उद्योगपति, प्रख्यात वैज्ञानिक, डाॅक्टर्स, कलाकर, आई ए एस, आई पी एस, शिक्षाविद्, न्यायविद्, प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभाग किया। इस कार्यक्रम के संयोजक श्री शरद श्री वास्तव जी अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव आईआईटीडीओ और श्री दीपक झा, उपाध्यक्ष आईआईटीडीओ तथा अध्यक्ष दीपक फाउंडेशन द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम के संयुक्त आयोजक भारतीय अंतराष्ट्रीय व्यापार विकास संगठन, प्रकाशा फाउंडेशन एवं दीपक फाउंडेशन है।
अटल रत्न सम्मान समारोह मावलंकर सभागार नई दिल्ली में आयोजित