ऋषिकेश, 5 जनवरी। परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री मनहर वालजी भाई जाला जी और उनकी टीम के सदस्य पधारे । परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग, नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री मनहर वालजी भाई जाला जी की भेंटवार्ता हुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष श्री मनहर वालजी भाई जाला जी से भारत को एकल उपयोग प्लास्टिक से मुक्त करने हेतु विस्तृत चर्चा की। स्वामी जी ने बताया कि फरवरी, 2020 में स्वच्छता के प्रति जागरूकता हेतु एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है इस विषय पर भी जाला जी से चर्चा हुई।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ''स्वच्छता के अभाव में देश की जनता को अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ता है। हमें बाहर और भीतर की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। भीतर और बाहर दोनों को स्वच्छ रखने के लिये हमें अपनी सोच को बदलना होगा। उन्होने कहा कि स्वच्छता ग्रही भाई-बहनों की लगन और मेहनत का परिणाम है कि विशाल जनसंख्या वाला राष्ट्र, खुले में शौच से मुक्त हो गया है अब हमें खुले में कूड़े से मुक्त भी बनाना है। हम सभी को मिलकर अपने राष्ट्र को एकल उपयोग प्लास्टिक से मुक्त बनाना है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि स्वच्छता और स्वास्थ्य का सीधा सम्बध राष्ट्र के विकास और समृद्धि से है। स्वच्छता तो संस्कार है जो हर व्यक्ति के अन्दर होना चाहिये, स्वच्छता दूत बाहरी परिवेश को स्वच्छ रखते है लोगों को अपनी सोच में परिवर्तन कर भीतरी वातावरण को भी बदलना होगा। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में स्वच्छता का विशेष महत्व है। स्वच्छता के अभाव में बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू जैसे रोग हो रहे हंै। उन्होने कहा कि जीवन में ''मेडिटेशन और सैनिटेशन दोनों आवश्यक है'' आईये स्वच्छता को जीवन का अंग बनाये और स्वच्छता के पैरोकार बने। आईये हम भी इस अभियान को अपना मिशन बनाये और सफाई, सच्चाई और ऊंचाई के रास्ते पर चले तथा भारत को स्वच्छ, स्वस्थ और समृद्ध भारत बनायंे।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग नई दिल्ली के अध्यक्ष श्री मनहर वालजी भाई जाला जी ने कहा कि भारत को स्वच्छ बनाये रखने में स्वच्छता कर्मी भाई बहनों का अद्भुत योगदान है। वर्तमान समय में स्वच्छता कर्मियों के प्रति बदलता लोगों का नजरिया वास्तव में परिवर्तनकारी सोच है। उन्होने कहा कि महात्मा गांधी जी का मानना था कि साफ-सफाई, ईश्वर भक्ति के बराबर है। बापू ने कहा कि ''स्वच्छता, स्वतंत्रता से भी ज्यादा जरूरी है'' ''स्वच्छता, हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है अतः स्वच्छता को अंगीकार कर आगे बढ़े।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्री मनहर भाई जाला जी को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया। सभी ने एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प लिया।
जीवन में मेडिटेशन और सैनिटेशन दोनों आवश्यक है-चिदानन्द सरस्वती