ऋषिकेश, 6 जनवरी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सूरत, गुजरात में आयोजित भागवत कथा के उद्घाटन समारोह में सहभाग किया।
सूरत में आयोजित कथा पूज्य रमेश भाई ओझा जी के मुखारबिन्द से तथा एस आर के हीरा ग्रुप के द्वारा आयोजित की गयी। भागवत कथा का उद्घाटन स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने रूद्राक्ष का पौधा देकर किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कथा यजमान सूरत के प्रसिद्ध हीरा व्यापारी जिन्होने भारत की शान पूरे विश्व में बढ़ायी है श्री गोविन्द भाई, उनके परिवार का भी रूद्राक्ष का पौधा देकर अभिनन्दन किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सूरत, गुजरात में 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी के भी विरोध में नहीं है। न ही किसी व्यक्ति के; जाति के और न ही किसी धर्म के विरोध में है। यह विधेयक देश को संगठित करने वाला; देश को मजबूत बनाने वाला तथा देश की अखंडता को बनायें रखने वाला कानून है। यह विधेयक किसी से कुछ छिनने के लिये नहीं है बल्कि सभी को कुछ देने का विधेयक है। स्वामी जी ने कहा कि किसी को भी भय और भ्रम में नहीं रहना चाहिये। भारत तो भाव की भूमि है हमें अपने दिलों में राष्ट्रभाव पैदा करना है। स्वामी जी ने भारत के युवाओं से आह्वान किया कि नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में जानकारी करे, उस विधेयक के बारे में जाने तथा दूसरों को भी बताये, पूरे देश के लोग एक साथ खड़ा होकर राष्ट्र हित में कार्य करे तथा देश के सुरक्षित और समृद्ध बनाने में योगदान प्रदान करे।
स्वामी जी ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी के खिलाफ नहीं है बल्कि देश की हिफाजत के लिये है। जो लोग दूसरों को गुमराह कर रहे है मंै उनसे कहना चाहता हूँ कि नफरत से किसी का नफा नहीं होता इसलिये नफरत न फैलाये, लोगों की एकता को न तोड़े इससे देश की अखंडता और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है। स्वामी जी ने कहा कि बहला-फुसलाकर भोली जनता और गरीबों को उपद्रव के लिये सड़कों पर लाया जा रहा है इसका उनके जीवन पर ही सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है इसलिये देेश के जिम्मेदार लोगों की यह जिम्मेदारी है; वफादार लोगों की वफादारी है कि सामने आकर जिस मिट्टी में जन्म लिया है, जहां का अन्न और जल ग्रहण किया है उस देश की रक्षा के लिये, उस मिट्टी की हिफाजत के लिये आगे आयें क्योकि उस मिट्टी ही हिफाजत ही आज की सबसे बड़ी जरूरत है और इबादत है इसका हमें ध्यान रखना होगा।
स्वामी जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि सूरत से हम सभी मिलकर देश की सूरत को बदले। खुद सूरत ने बदली सूरत की सूरत, 1 लाख अस्सी हजार करोड़ हीरों का और कपड़ा व्यापार केवल सूरत से ही होता है। उन्होने कहा कि चाहे फ्लेग आया चाहे फल्ड आया या फिर कोई तूफान आया परन्तु सारा शहर खड़ा हो गया और सब ने मिलकर सूरत की सूरत ही बदल डाली, काश इसी तरह से देश के हर गांव और शहर के लिये हम सभी 130 करोड़ लोग खुद भी खड़े हो और दूसरे लोगों को भी खड़ा करे। किसी को भी किसी भ्रम या भय का शिकार न बनाये, अपने वतन की मजबूती के लिये आगे आये।
स्वामी जी ने कहा कि गुजरात की धरती सूरत में केवल हीरों का व्यापार ही नहीं होता है हीरों की इस नगरी ने दो नायाब हीरों को गुजरात से दिल्ली भेजा और दिल्ली में सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास के सूत्र को साथ लेकर आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी और श्री अमित शाह जी ने देश को आगे बढ़ाने के लिये हर सम्भव प्रयास किया है। उनका अपना कोई भी न स्वार्थ है न उनका अपना कोई एजंेडा है। उनका एजेंडा भी है तो जैसे सूरत में हीरों को तराशा जा रहा है वैसे ही भारत को तराशने का कार्य ये दो गुजरात से आये हीरे मिलकर करे ताकि भारत एक नये भारत की ओर प्रस्थान करे; नये भारत की ओर आगे बढ़े बस यही तो है प्रयास। आईये सब मिलकर हम इस प्रयास को आगे बढ़ायें।
श्री रमेश भाई ओझा जी ने कहा कि जो सत्य के पक्ष में है, सत्य उनके पक्ष में है और जो सत्य की रक्षा करते है सत्य उनकी रक्षा करता है। जो अपने धर्म की रक्षा करता है तो धर्म उनकी रक्षा करता है। उन्होने कहा कि सफलता और विफलता दोनों ही जीवन का हिस्सा है। परन्तु सभी सफलता ही पाना चाहते है लेकिन मूल्यों का बलिदान करके पायी गयी सफलता, विफलता से भी अधिक खतरनाक है। अतः सत्य के राह पर चलना ही धर्म है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भागवत कथा श्रवण करने 30 से 40 हजार की संख्या में आये भक्तों को एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने, पर्यावरण एवं जल संरक्षण तथा पर्वों, उत्सवांे, विवाह और जन्मदिन के अवसर पर वृक्षारोपण का संकल्प कराया। स्वामी जी ने कहा कि समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करे तथा एक-एक व्यक्ति दस-दस लोगों को जोडे़ जिससे पूरे समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण हो सके।
सूरत में भागवत कथा के उद्घाटन समारोह में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सहभाग किया